चाहने के लिए एक ही         चेहरा काफ़ी है   मुंह मारने के लिए पूरा       शहर भी कम है..

  शुरुवात तो सभी अच्छी     करते हैं, मसला तो  सारा आखिर तक अच्छे        बने रहने का हैं

 किसी को "पट्टी" पढ़ाने से   अच्छा तो ये होता कि,  हम किसी के "घावों" पे "पट्टी" बांधना सीख जाए

   दूसरे की बुराई देखना       और सुनना ही बुरा बनने की सुरुआत है

    अपनी कामयाबी को       PRIVATE रखो, जब तक वो PERMANENT            ना हो जाए

    कुछ लोग आपसे नही   आपकी स्तिथि से हाथ  मिलाते है

    आप अपनी जिंदगी में    जिन लोगों को रखते है   उन्हे बहुत ध्यान से चुनो

तुम CRY करने से नही बल्कि TRY करने से कामयाब बनोगे