लफ्ज़, अल्फाज़, कागज़ और किताब, कहाँ-कहाँ नहीं रखता मैं तेरी यादों का हिसाब

मुझसे दूर जाने की बात मत करो,, देख मैं डर गया हू , मर भी सकता था,

तलब ये के तुम मिल जाओ…. हसरत ये के उम्र भर के लिए!!

तेरे इश्क़ में इस तरह नीलाम हो जाऊ… आख़री हो तेरी बोली और में तेरे नाम हो जाऊ!!

फिक्र तेरी है मुझे इसमें कोई शक नहीं तुम्हे कोई और देखे किसी को ये हक नहीं.

शौक़ है इस दिल-ए-दरिंदा को, आप के होंठ काट खाने का।

है इश्क तो फिर असर भी होगा, जितना है इधर , उधर भी होगा।

मेरे दिल की हर धड़कन पर तेरी ही हुकूमत हो, मेरे इश्क की सारी राहें तुम से तुम तक हो।

मोहब्बत से मोहब्बत तब हुई जब मोहब्बत तुम से हुई...

सांसे तो रोक लू अपनी,ये तो मेरे बस में है! यादें कैसे रोकू तेरी, तू तो मेरी नस-नस में है।

अपनी  मोहब्बत  को वो अंज़ाम दे दूँ, अपने  हुनर  को मैं  तेरा  नाम दे दूँ!

प्रेम की उम्र नहीं होती ना ही दौर होता है प्रेम तो प्रेम है जब होता है बेहिसाब होता है.