Internet क्या है और Internet कैसे काम करता है? – पूरी जानकारी हिंदी में

दुनिया में चार सौ करोड़ से ज्यादा लोग Internet इस्तेमाल करते हैं। भारत इंटरनेट यूजर्स के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। Internet And Mobile Association Of India की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 दिसंबर में 50 करोड़ से ज्यादा लोग किसी न किसी तरीके से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे थे।

भारत में अगर ये Article आप पढ़ रहे हैं तो ये इंटरनेट के जरिए ही आप तक पहुंच होगी। लेकिन ये इंटरनेट काम कैसे करता है जब आप इंटरनेट ओन करते हैं तो वो क्या चीज है जिससे आप जुड़ जाते हैं। कैसे एक क्लिक करते ही कोई भी मैसेज गाना या वीडियो आपकी स्क्रीन तक पहुंच जाता है। आपके क्लिक करने और स्क्रीन बदलने के नज़ारे के बीच क्या क्या होता है क्या आप जानते हैं।

इंटरनेट क्या काम करता है?, कैसे काम करता है? और सबसे बड़ा सवाल इंटरनेट का मालिक कौन है? ये सब हम आपको समझाएंगे तो आइए एक एक करके सारे धागे ओढ़ेरहते हैं।

Internet kya hai
Internet Kya Hai

Internet कैसे काम करता है?

Intenet मतलब Interconnected Network बहुत सारी डिवाइसेस का मोबाइल का कंप्यूटर्स का राउटर्स का सर्वर्स कई सारे डिवाइसेस हैं इन सारी डिवाइसेस का एक बहुत बड़ा नेटवर्क है। इस नेटवर्क का काम है कि कनेक्ट करना यानी जोड़ना बहुत सारे कंप्यूटर्स और दूसरे डिवाइस को आपस में जोड़ना ताकि इनके बीच डेटा का लेनदेन मुमकिन हो पाए।

सारा खेल देखिए डेटा का ही है ये जो Article आप पढ़ रहे हैं इंटरनेट पर पढ़ रहे हैं तो वो भी एक तरीके का डेटा ही है Text format डेटा लेकिन ये डेटा तो मेरे डिवाइस में लिखा गया है| हमारे पास है। फिर यह डेटा आपके फोन पर आपके लैपटॉप तक और आपके कंप्यूटर तक कैसे पहुंचा?

मेरे डिवाइस और आपके डिवाइस के बीच एक सर्वर जो भी डेटा इंटरनेट पर मौजूद है जो भी डेटा इंटरनेट पर मौजूद होता है वो किसी न किसी सर्वर पर रखा होता है। सर्वर भी एक तरह का कंप्यूटर ही होता है। बस उसका काम होता है कि उसको डेटा को सहेज के रखना है और जिसकी जैसी डिमांड हो उसी के हिसाब से डेटा सप्लाई करना है स्टोर करना।

जब यह Article इंटरनेट पर अपलोड हुई तो ये डेटा एक सर्वर में जाकर स्टोर हो गया और जब आपने इसके Link पर क्लिक किया तो सर्वर ने इसे आपके डिवाइस तक ये Article डेटा पहुंचा दिया।

Server क्या है?

Server(सर्वर) एक प्रकार का कंप्यूटर है जो अन्य कंप्यूटरों और उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करता है। यह एक कंप्यूटर हो सकता है या कंप्यूटर प्रोग्राम हो सकता है जिसे कंप्यूटर में लोड किया जाता है ताकि अन्य कंप्यूटरों को डेटा और सूचना भेज सके। सर्वर का काम इंटरनेट के यूजर्स को सर्विस देना है यानी यूजर्स को वो सारी जानकारी देना जो वे जानना चाहते हैं।

Server कहां होता है और कैसे काम करता है?

जादा तर वेबसाइट के सर्वर डेटा सेंटर्स में होते हैं जैसे खूब सारा सामान इकट्ठा करने के लिए गोदाम या वेयरहाउस होते है वैसे ही खूब सारा डेटा इकट्ठा करने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स होते हैं और एक एक डेटा सेंटर्स में खूब सारे सर्वर्स रखे होते हैं। डेटा सेंटर में इन सर्विस को सुविधा और सुरक्षा मुहैया की जाती है।

मान लीजिए आप ये कोई विडियो YouTube पर देख रहे है या फेसबुक पर भी देख सकते हैं हमारी वेबसाइट पर भी देख सकते हैं। कहीं भी देख सकते हैं हम मान लेते हैं कि आप कोई यूट्यूब पर देख रहे हैं तो जो विडियो का डेटा है वो गूगल के डेटा सेंटर में रखा होगा | YouTube गूगल का है तो गूगल के डेटा सेंटर में इसका वीडियो का डेटा स्टोर होगा।

ऐसे ही फेसबुक माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी बड़ी कंपनीज के बड़े बड़े डेटा सेंटर्स हैं। लेकिन हर वेबसाइट अपने डेटा सेंटर नहीं होती जैसे कि WWW.Techunique.in ने अपना डेटा सेंटर नहीं खोला। ये छोटे-छोटे जो website होती हैं दूसरों के मुकाबले में से छोटी होती हैं वो दूसरों के डेटा सेंटर के सर्वर इस्तेमाल करते हैं।

Amazon जैसी कई कंपनीज हैं जो दूसरों को अपने डेटा सेंटर्स के सर्वर किराए पर देती हैं। Amazon Web सर्विसेस का अपना नाम सुना होगा। नेटफ्लिक्स और दूसरी ऐसी वेबसाइट्स हैं वो भी Amazon से सर्विस कराये पर लेते हैं।

Internet आप तक कैसे पहुंचता है?

यहां पर जो मैंने आपको ज्यादातर कंपनीज के नाम बताए। ये अमेरिकन कंपनी से Facebook, Google, Microsoft और Amazon ये सब अमेरिकन कंपनी है | तो इनकी जो डेटा सेंटर्स हैं वो भी अमेरिका में हैं। मतलब ये डेटा आपके घर में हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के किसी डेटा सेंटर से आ रहा है। वहां तो कायदे से जमा करके रखा हुआ है और हर रोज जो नया डेटा इन वेबसाइट से अपलोड होता है वो उन्हीं डेटा सेंटर्स में जाता है।

अब इस डेटा को दुनिया के दूसरे छोर पर बैठे यूजर्स तक यानी आप तक पहुंचाना है।ये कैसे होता है। इसके कई तरीके हो सकते थे। एक आसान तरीका ये हो सकता था कि सैटलाइट के जरिए वहां से डेटा ट्रांसफर कर लिए जाता USA से | लेकिन ये निहायत धीमी प्रोसेस है सैटलाइट पृथ्वी की सतह से बहुत ऊपर होती है। मतलब तो डेटा पहले तो सैटलाइट तक पहुंचाना पड़ेगा फिर वहां से वापस धरती को लाना होगा तो ये बहुत एक लंबी दूरी हो जाती है।

फ्लैट धरती के मुकाबले इन चक्करों में खूब सारा समय लग जाता है और वो स्पेस नहीं मिल पाती जो आपको चाहिए। इसका एक तोड़ निकाला गया Optical Fibre Cable पूरी दुनिया में केबल्स का जाल बिछाया गया है फाइबर का एक्सचेंज होता एक बहुत ही पतला तार होता जो फाइबर का वो हमारे बाल जितना पतला होता है और एक फाइबर केबल में ऐसे कई ताकत होते हैं। ऑप्टिकल फाइबर से डेटा लाइट सिग्नल के जरिए भेजा जाता है।

आमतौर पर जो वायर हम देखते हैं वो कॉपर वायर होता है और उसमें इलेक्ट्रिकल सिग्नल होता है। विद्युत इलेक्ट्रिसिटी से भेजा जाता है लेकिन जो रोशनी होती है उसके जरिए भी डेटा भेजा जा सकता है और फाइबर ऑप्टिक्स के अंदर ये लाइट सिग्नल के फोम में भेजा जा सकता। लाइट की स्पीड दुनिया में सबसे ज्यादा होती है।

सभी जानते हैं लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रति सेकंड फाइबर में डेटा लगभग लाइट की स्पीड से ही भेजा जाता है बिल्कुल लाइट की स्पीड से नहीं भेजा जाता क्योंकि वह टेढ़ा मेढ़ा (निचे ऊपर) हो करके जाता है वो सीधे नहीं जाता है तो लगभग लाइट की स्पीड होती है लेकिन इसलिए क्लिक करते ही डेटा आपकी स्क्रीन पर तुरंत हाजिर हो जाता है।

भले ही आपको दिखाई न दे पर हर उस जगह तक ऑप्टिकल फाइबर केबल की पहुंच है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी है। या यूं कह सकते हैं कि इंटरनेट सिर्फ वहीं तक पहुंच पाता है जहां ये केबल उसे पहुंचा पाती हैं। सारे महाद्वीप को इंटरनेट से जोड़ने के लिए समंदर के नीचे इन्हीं फाइबर केबल का जाल बिछा हुआ है।

कई बड़ी कंपनियां समंदर की गहराई में ये फाइबर केबल बिछाने का ही काम करती है। जब समंदर के बाद । जमीन शुरू होती है तो ये केवल (अंडर ग्राउंड) यानी जमीन के नीचे हो जाती है। जमीन के नीचे से ही ये केबल्स आपके शहर मोहल्ले और घर तक पहुंचती हैं।

डिपेंड करता है कि (fiber to the neighborhood) होता है। (fiber to the home) होता है यानी आपके आसपास तक फाइबर आ रहा है या सीधे के घर तक किया जा रहा है तो इस पर निर्भर करता है लेकिन आता वह फाइबर से ही है | यही वजह है कि हमें यह दिखाई नहीं पड़ती क्योंकि ये जमीन के नीचे या समुद्र के नीचे ही होते हैं।

Optical Fibre Cable connect with Tower
Optical Fibre Cable connect with Tower

अब आप कहेंगे कि हमारे फोन में तो ऐसा कोई फाइबर केबल नहीं जुड़ा है फिर भी इसमें इन्टरनेट चलता है। तो ऐसा इसलिए है क्योंकि ये केबल फाइबर केबल आपके सबसे नजदीक मौजूद सेलफोन टावर से जुड़ी हुई है। जिससे आपके फोन में सिग्नल आता है।

फाइबर से होते हुए ये डेटा सेलफोन टावर तक आता है और वो टावर आपके फोन में Electromagnetic waves यानी विद्युत चुम्बकीय तरंगों की शक्ल में वो डेटा आपके फोन तक पहुंचा देता है और आप अपने फोन पर इंटरनेट का मजा ले पाते हैं।

Internet पर Data को लेनदेन कैसे होता है?

अब हम ये समझने की कोशिश करते हैं कि इन केबल्स के जरिए डेटा का लेन-देन कैसे होता है। हालांकि इतने सारे सर्वर हैं इतने सारे फोन हैं लैपटॉप या कंप्यूटर हैं इतने सारे डिवाइस इंटरनेट से जुड़े हुए हैं तो सर्वर को कैसे पता चलता है कि कहां डेटा भेजना है और आपके फोन को कैसे पता चलता कि किस वाले सर्वर से डेटा मंगाना है। कहां पर रखा हुआ है।

तो यह पर काम आता है। IP Address इसे पोस्ट सर्विस से समझा जा सकता है डेटा भी आपके फोन तक वैसे ही पहुंचता है या आपके डिवाइस तक वैसे ही पहुंचता है जैसे आपके घर में पोस से खत आता है जिस तरह आपके घर का एक Unique Address होता है जिसकी मदद से डाकिया अब तक खत पहुंचा देता है ठीक उसी तरह इंटरनेट से जुड़े हर डिवाइस का भी एक Unique Address होता है।

हर डिवाइस मतलब हर डिवाइस सर्वर का भी होगा, राउटर का भी होगा। लैपटॉप का, फोन का जितना डिवाइस इंटरनेट से जुड़े हुए हैं उन सबका एक Unique Address होता है और उसे कहते हैं IP Address यानी Internet Protocol Address चूंकि कंप्यूटर गणित की भाषा समझते हैं इसलिए यह IP Address भी एक नंबर होता है। 192.168.0.0 कुछ इस तरह से Address होता है।

तो जब आप किसी Link पर क्लिक करते हैं तो फाइबर पाइप लाइन से होती हुई उस वेबसाइट के सर्वर तक एक request जाती है। हर वेबसाइट का एक सर्वर होता है जहां उसका डेटा रखा हुआ होता तो जैसे ही आप Link पर क्लिक करते हैं उसके सर्वर तक एक request जाती है।

इस request में लिखा होता है कि सर्वर जी हमें फलाने IP Address पर यानी आपके IP Address पर डेटा पहुंचाना है। उस वेबसाइट का डेटा पहुंचाना। फिर सर्वर से हजारों किलोमीटर दूर से डेटा आपके IP Address के लिए रवाना होता है।

आप ही पहुंचाते हैं सर्वर तक हमारी Request किसी वेब ब्राउजर में वेबसाइट एंटर करके या किसी Link पर क्लिक करके जब आप ऐसा करते हैं तो उस पर Request पहुचती हैं। हर वेबसाइट के सर्वर का भी एक IP Address होता है।

मैंने आपको बताया था तो जिसकी मदद से सर्वर तक पहुंचा जा सकता है। लेकिन हर वेबसाइट का IP Address याद रख पाना यूजर के लिए बहुत मुश्किल है इसलिए IP Address के लिए Domain Name दे दिया जाता है। Domain Name क्या है इसके बारे में निचे बताया गया है।

यह Domain name ब्राउज़र में इंटर करते ही वेब ब्राउजर या मोबाइल ऐप्लिकेशन उस वेबसाइट का IP Address खोजने में लग जाता है। ठीक वैसे ही जैसे फोन नंबर याद रखना मुश्किल होता है तो लोग फोन बुक मेंटेन करते हैं तो अपनी फोन बुक में किसी नाम के सामने उसका नंबर खोजा जाता है तो इंटरनेट Domain name और IP Address की भी एक फ़ोन बुक होती है। और उसको कहते हैं DNS Server.

DNS सर्वर की मदद से हमारा वेब ब्राउजर उस वेबसाइट का IP Address ढूंढ निकालता है और आपकी Request उस वेबसाइट के सर्वर तक पहुंचा देता है उस Request में आपके डिवाइस का IP Address भी लिखा होता है। क्योकि बताना भी पड़ेगा सर्वर को की इस IP Address पर पहुंचाना है तो उस Request में ये सारी डिटेल होती है | इस तरीके से आप उस सर्वर से डेटा का लेनदेन कर पाते हैं।

DNS Server क्या होता है?

DNS एक एसी Internet सेवा है DNS यानि की Domain Name System जो की Domain Names को IP Address में बदल देता है। Domain Name System सेवा का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि मनुष्य Domain name (जैसे – Verita.in.net, या google.com) को आसानी से याद कर सकता है जबकि जो Internet है वह IP Address पर आधारित होता है।

DNS को संचालित करने का काम ICANN नाम की संस्था करती है। नही तो लोगों के बीच लड़ाई मचाएगी कि मुझे यह IP Address चाहिए या मुझे ये Domain name रखना है। तो एक संस्था है। ICANN यानी Internet Corporation for Assigned Names and Numbers.

Internet का मालिक कौन है?

आप तक Internet पहुंचाने का काम करती है आपकी ISP यानि Internet Service Provider जैसे आपने जिस Company का Sim लिया होगा या Broadband Connection लिया होगा तो, वह आप की Internet Service Provider है। और आप पैसे भी उसी को देते है ISP को लेकिन यह पूरा Internet नही चलते है।

अगर बड़े Level पर देखे तो ISP को Level से बाँटा जा सकता है। पहली जो बड़ी-बड़ी कंपनी होती है वह कंपनी जिन्होंने सुंदर के नीचे Cable बिछा या है पहले level पर वह कंपनी आती है इन्हें हम Tier 1 में रखते है।

इसके बाद आती है वह ISP जिनकी Cable देश भर में बिछा हुए है। यह Tier 2 की कंपनी हो गयी। अगर Tier 2 कंपनी को internet service चाहिए तो उसे Tier 1 की कंपनी का Cable उपयोग करना पड़ेगा या उसे rent पर लेना होगा और इसके लिए Tier 1 की ISP कंपनी को पैसे देने पड़ेंगे।

ठीक इसी तरह Tier 3 में आने वाली कंपनी जो Local ISP होती है, तो उनको Tier 2 की कंपनी को पैसा देना पड़ेगा जिनकी Cable देश भर में बिछा हुए है। ताकि वह internet को अपने ग्राहक तक पहुंचा सके।

तो इस तरह हमारा दिया हुआ पैसा इन कम्पनी के बीच में बट जाता है। मतलब सीधे-सीधे बोले तो Internet का पूरा-पूरा मालिक कोई नही है। अलग-अलग कंपनी अलग-अलग हिस्से को चलती है और इसे चलने के लिए अलग-अलग संस्था बनाया गये है जैसे ICANN आप को बतया था।

इंटरनेट की दुनिया में सबसे बड़ा रोल infrastructure का है जिस कंपनी का सबसे विस्तृत infrastructure होगा उसकी उतनी ही ज्यादा कमाई होगी।

आज आपने क्या सीखा

तो उम्मीद है कि आपको समझ में आ गया होगा कि Internet क्या काम करता है? और कैसे काम करता है और सबसे बड़ा सवाल इंटरनेट का मालिक कौन है। अगर आप ये Article पसंद आई हो तो शेयर करके अपना सपोर्ट दिखाना बिल्कुल भी न भूले तब तक अपना ख्याल रखें। अगर आप के मन में कोई भी सवाल है तो आप हमें Instagram पर यह comment box में पूछ सकते है।

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