Cyber Crime क्या है?

अगर आप भी अपने बिजनेस से जुड़े ज्यादातर काम इंटरनेट के जरिए करते हैं तो आपके लिए Cyber Crime के बारे में जानना बेहद जरूरी है। क्योंकि इंटरनेट ही एक ऐसा जरिया है जो विदेश में बैठे लोगों को आपस में जोड़ने का काम करता है और कारोबार बढ़ाने का काम करता है, धीरे-धीरे साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है।

Cyber Crime
Cyber Crime Kya hai

Cyber Crime क्या है?

अगर हम आसान शब्दों में बात करें तो साइबर क्राइम एक ऐसा अपराध है जिसमें कुछ अपराधी आपके फोन और इंटरनेट से अलग-अलग तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर साइबर क्राइम को अंजाम देते हैं। वे आपके फोन और लैपटॉप से आपके सभी व्यक्तिगत डेटा को उन सॉफ़्टवेयर और कुछ अलग प्रकार की Link के माध्यम से चुरा लेते हैं, जिसे साइबर अपराध कहा जाता है।

ऑनलाइन किसी की जानकारी चोरी करना, या फर्जी कम करना और बिना अनुमति के किसी की जानकरी शेयर करना या गलत उपयोग करना यह सब Cyber Crime ही होता है।

Cyber Crime के प्रकार

साइबर क्राइम बहुत से प्रकार के होते है चलिए जानते है।

  1. सोशल मीडिया से फोटो चुराना
  2. साइबर बुल्लयिंग
  3. वायरस सॉफ्टवेयर
  4. पहचान चुरा लेना
  5. साइबर स्टॉकिंग
  6. साइबर स्पाइंग
  7. हैकिंग
  8. चोरी

Cyber Crime Investigation Cell की Head Office कहाँ पर स्थित है?

Superintendent of Police, Cyber Crime Investigation Cell,
Central Bureau of Investigation,
5th Floor, Block No.3,
Lodhi Road, New Delhi 110003
Ph:011-24361271
Speou9del@cbi.gov.in

साइबर क्राइम को रोकने के उपाय

सबसे पहले एक साइबर अपराध शिकायत दर्ज करें, वह भी लिखित शिकायत अपने शहर में या आसपास के साइबर अपराध प्रकोष्ठ में जहां आप रहते हैं।

जब आप साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करते हैं, तो आपको अपना नाम, संपर्क विवरण और डाक पता देना होता है। इसके बाद आपको अपने शहर में साइबर क्राइम सेल के प्रमुख को एक लिखित शिकायत भी करनी होगी जहां आपने शिकायत दर्ज की थी।

यदि आप किसी ऑनलाइन उत्पीड़न के शिकार हैं, तो पुलिस स्टेशन में रिपोर्टिंग के दौरान एक कानूनी सलाहकार आपकी सहायता कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आपको अपनी शिकायत के साथ कुछ दस्तावेज भी देने पड़ सकते हैं। यह निर्भर करता है कि आपके साथ किस तरह का अपराध हुआ।

Note:- धारा 154 के तहत यह अनिवार्य है कि, दंड प्रक्रिया संहिता में, किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए यह अनिवार्य है कि वह पीड़ित की शिकायत दर्ज करे, चाहे वह अपराध ही क्यों न हो. ऐसे में कोई भी पुलिस अधिकारी शिकायत दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकता है।

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