Coffee मजाक नहीं है | Coffee is not a joke 🔥

कॉफ़ी एक कप देखने में बहुत ही साधारण लगती है। लेकिन पूरी दुनिया में लगभग 200 करोड़ कप कॉफी का हर रोज इस्तेमाल किया जाता है। जिम जाने वाले लोग ऐसे प्री वर्कआउट कॉफी का इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग रात को जागने के लिए कुछ लोग सुस्ती भगाने और कुछ लोग बस यूं ही टेस्ट के लिए कॉफी का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कॉफी शरीर में जाकर आखिर करता क्या है  दिनों में कितने कप कॉफी पी जा सकती है। चाय और कॉफी में क्या फर्क होता है। और ये शरीर को कितना फायदा और कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। जानेगे इस आर्टिकल में।

Coffee ? | How to make coffee?

How to make coffee
Coffee के बारे में कहा जाता है कि कॉफी की खोज एक चरवाहे ने की थी। अफ्रीका में रहने वाले कालगीय नाम का एक व्यक्ति जब अपनी बकरियां चराने के लिए जंगल की तरफ जाता है तो उसने देखा कि एक लाल रंग का फल है। जिसे खाकर उसकी बकरियां ज्यादा ऐक्टिव होकर इधर-उधर उछलने कूदने लगी है तो कन्फर्म करने के लिए उसने खुद उस फल को खा कर देखा जिसे उसने बहुत ही एनर्जेटिक और अच्छा महसूस किया। वो कॉफी के कुछ दाने लेकर वहीं नजदीक में मौजूद एक बुजुर्ग को दिखाकर इसके बारे में और ज्यादा जानने की कोशिश करने लगा।

लेकिन तभी बुजुर्ग ने इनकार करते हुए कॉफी के दाने को वहीं पर लगी आग के अंदर फेंक दिया। तभी उन्हें खुशबू का एहसास हुआ जो कि कॉफी जलने की वजह से आग के अंदर से आ रही थी। इसी बात से कॉफी के दाने को भून कर इस्तेमाल करने का आइडिया आया और फिर दुनिया की सबसे पहली कॉफी यहीं पर बनाई गई थी।

आज भी ये कॉफी के दाने पेड़ पर लगते हैं और लाल रंग के कवर में बंद होते हैं. जिसके अंदर हल्की ग्रीन रंग के दाने होते हैं। और फिर इस गाने को भूनने के बाद वह ब्राउन कलर में तब्दील हो जाता है जिसे फिर पाउडर फॉर्म में बदलकर मार्केट में बेचा जाता है। ज्यादातर लोग ये बात नहीं जानते कि हर कॉफी पाउडर देखने में तो लगभग एक जैसा ही होता है। लेकिन क्वालिटी और टेस्ट के नजरिए से ये कई तरीके के हो सकते हैं।

Types of Coffee

Coffee का दो सबसे मेन टाइप है जिसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

  1.  Arabica
  2. Robusta

Arabica Coffee बींस सबसे हाईएस्ट क्वालिटी की Coffee होती है। जिसका पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है इसका टेस्ट दूसरी Coffee के मुकाबले ज्यादा बेहतर होता है इसमें तीता पर और कैफीन की मात्रा भी थोड़ी कम होती है इसलिए यह Coffee प्राइस में ज्यादा होती है।

Robusta यह वर्ल्ड में सेकंड सबसे मशहूर Coffee है जिसकी कीमत अरेबिका Coffee के मुकाबले कम होती है। इसका सल्मे और टेस्ट थोड़े स्ट्रांग होता है साथ ही इसमें तीतापन और कैफीन की मात्रा भी ज्यादा होती है। यह Coffee के दाने अरेबिका Coffee के मुकाबले साइज़ में थोड़ा गोलाकार होते हैं।

अगर Coffee पीने का सही समय और सही तरीका पता हो तो इसे कई सारे फायदे भी उठाए जा सकते हैं और ऐसा इसलिए कि Coffee में पॉलीफेनॉल और कई दूसरे एंटी ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। जो कि शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स जहरीले पदार्थ को reduce करके कुछ हद तक ओवरऑल बॉडी को इंप्रूव करने का काम करता है।

Coffee में कुछ फायतो nutrient भी पाए जाते  हैं जो लीवर प्रॉब्लम को पिर्वेंट करने में कुछ हद तक मददगार होता है। Coffee मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करके As A Fat burner की तरह भी काम करता है। लेकिन इसके लिए Coffee को बिना दूध और बिना चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। हाला की कई सारी साइंटिफिक स्टडी बताती है। की शुरुआत में कॉफ़ी इस्तेमाल से Fat Lose थोड़ी मदद मिलती है। लेकिन धीरे-धीरे इसका असर भी  कम हो जाता है।

Coffee जिस फायदे के लिए पूरी दुनिया मै सबसे जादा यूज़ किया जाता है। वो है मेंटलअलर्टनेस आसान भाषा में कहा जाए तो सुस्ती भगाने का शॉर्टकट तरीका। Coffee में जो सबसे मेन इंग्रीडिएंट्स होता है वह है कैफीन जिसका आपके दिमाग पर बहुत ही अलग तरह से असर होता है। इससे सुस्ती गायब हो जाती है। और आपको पहले से ज्यादा एनर्मजेटिक महसूस होने लगता है।

ज्यादा Coffee पीने से सेहत को हो सकता है नुकसान, जानिए कैसे?

खैर ये तो हुई  Coffee की कुछ अच्छी बातें लेकिन आपको ये नहीं भूलना चाहिए कि अभी के टाइम में पूरी दुनिया में कॉफी एक बहुत बड़ा बिजनेस है। इसलिए ज्यादातर लोग सिर्फ इसके फायदे ही बताते हैं। यहां तक कि इंटरनेट पर बहुत सारी साइंटिफिक स्टडी भी मौजूद हैं। जो कि कॉफी के दिल खोलकर तारीफ करती हैं। क्योंकि उन्हें कॉफी इंडस्ट्री ने इसके लिए पैसे दिए होते हैं। लेकिन जहां कॉफी के कुछ फायदे हैं वहीं इसके गलत इस्तेमाल से लॉन्ग टर्म में कई सारे नुकसान भी हो सकते हैं।

सबसे पहले तो कॉफी एसिडिक होती है। जो कि पेट में एसिड की मात्रा को बढ़ाने का काम करता है। खासकर ऐसे लोग जो सुबह खाली पेट कॉफी का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें सीने में जलन और एसिडिटी की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ सकता है। कॉफी का असर 15 से 20 मिनट के अंदर ही हमारे दिमाग तक पहुंच जाता है। और लगभग 6 घंटे से भी ज्यादा समय के लिए कॉफी हमारे खून में मौजूद होता है। इसलिए खासकर जो लोग दोपहर के बाद कॉफी पीते हैं। उन्हें ठीक से नींद ना आने की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कॉफी हमारे शरीर में स्टोर नहीं होता। यही वजह है कि जो भी कॉफी की मात्रा हमारे खून में होती है उससे हमारी किडनी फिल्टर करके बार-बार शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करने लगता है। इसलिए आप जितना सादा कॉफी पीते हैं। उतना ज्यादा बार आपको टॉयलेट का चक्कर लगाना पड़ सकता है। और जिसे डीहाइड्रेशन की भी प्रॉब्लम हो सकती है।

हमारे शरीर में किडनी के ऊपरी हिस्से पर एक ग्रंथि होती है। जिसे एडिश्नल ग्लैंड के नाम से जाना जाता है। कॉफी इस ग्रंथि को ज्यादा मात्रा में एक हॉर्मोन रिलीज करने सुर्मुलेट करता है। जिसका नाम है ADRENALINE इस हॉर्मोन के खून में ज्यादा होने से दिल की धड़कन तेज होती है। इनसाइट्स लेवल बढ़ता है और ब्लड प्रेशर भी इनक्रीज होने लगता है। इसलिए जिन लोगों को धड़कन तेज होने या दिल से जुड़ी बीमारी है। या इनजायति और घबराहट महसूस होती है। या हाई ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है। तो उन्हें कॉफी से दूर ही रहना चाहिए क्योंकि ये प्रॉब्लम और भी ज्यादा बढ़ सकते हैं। और यही वजह है कि प्रेगनेंट औरतों को भी कॉफी पीने से मना किया जाता है।

यहां तक कि नॉर्मल लोगों को भी कुछ शर्तो को ध्यान में रखते हुए ही कॉपी का इस्तेमाल करना चाहिए। ज्यादातर लोगो को लेते हैं। कि कॉफी पीने के बाद जो एनर्जी महसूस होती है। वह कॉफी से मिलती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दरअसल हमारे दिमाग में एक ADENOSINE नाम का हॉर्मोन होता है। जो कि एक न्यूरोट्रांसमीटर की तरह काम करता है। हमारे दिमाग में इस तरह के कुछ रिसेप्टर होते हैं। जब हमारा दिमाग थकने लगता है। तो ADENOSINE हॉर्मोन इस रिसेप्टर से चिपक कर हमें सुस्ती और हल्की नींद के रूप में इशारा देता है। कि हमारे दिमाग को आराम की जरूरत है। लेकिन जब ऐसे में हम आराम करने के बजाय कॉफी पीते हैं। तो कॉफी में मौजूद कैफीन हमारे दिमाग तक पहुंचकर ADENOSINE हॉर्मोन का रिसेप्टर से चिपकने से रोक देता है। और खुद उसी रिसेप्टर से जाकर चिपक जाता है। जिसे दिमाग को थके होने का सिग्नल ही नहीं मिल पाता।

इसलिए सुस्ती गायब हो जाती है। और अच्छा महसूस होने लगता है। फिर जब धीरे-धीरे कॉफी का असर खत्म होता है। तो क्यों कि आप थके हुए दिमाग से ही काम करवा रहे थे इसलिए ADENOSINE हॉर्मोन फिर से आपके दिमाग में मौजूद रिसेप्टर से आकर चिपक जाते हैं। जिसे आपको पहले से भी ज्यादा सुस्ती महसूस होने लगती है और वापस से शरीर में एनर्जी लाने के लिए फिर से आपको कॉफी पीने का मन करने लगता है। बेसिकली हम कॉफी पीकर हमारे थके हुए दिमाग को और ज्यादा एनर्जी प्रोड्यूस करने के लिए बेवकूफ बनाते हैं। लेकिन कुछ हफ्ते या कुछ महीने बाद हमारे दिमाग को हमारी इस टेक्नीक का पता चल जाता है। इसलिए दिमाग में नए रिसेप्टर डेवलप हो जाते हैं। क्योंकि आपके दिमाग में सुस्ती महसूस करवाने वाले रिसेप्टर ज्यादा हैं।

इसलिए अब दिमाग को बेवकूफ बनाने के लिए आपको कॉफी की मात्रा भी बढानी पड़ती है। और यही वजह है कि शुरुआत लोग एक कप कॉफी से करते हैं। लेकिन धीरे-धीरे एक से दो, दो से तीन, तीन से चार, चार से पांच बार इस तरीके से एक के बाद एक कप कॉफी बढ़ाते ही जाते हैं। क्योंकि ऐसा करना आपकी मजबूरी हो जाती है। और जब ऐसा करते हुए आपको एक लंबा अरसा गुजर जाता है। तो फिर मानो कॉफी के बिना दिन की शुरुआत होती ही नहीं और पूरे दिन सुस्ती सरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है।

कॉफी को एक्सर्साइज से पहले भी इस्तेमाल किया जाता है। और ऐसे सप्लिमेंट जिसे प्री वर्कआउट सप्लिमेंट के रूप में मार्केट में बेचा जाता है। उसमें भी मीन इंग्रीडिएंट्स कैफीन होता है। एक्सर्साइज से पहले कॉफी पीने से एनर्जेटिक महसूस होता है। और वेट लिफ्टिंग करना ज्यादा आसान हो जाता है। लेकिन ये एक टेम्परेरी एनर्जी होती है। जैसे कि लगातार कॉफी का इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे शरीर कॉफी पर ही डिपेंड होने लगता है। और फिर बिना कॉफी पिए एक्सरसाइज कर पाना पहले से भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

Coffee से फायदा उठाने और उसके नुकसान से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

अब सवाल ये उठता है। कि आखिर कॉफी से फायदा उठाने और उसके नुकसान से बचने के लिए क्या करना चाहिए।

सबसे पहले तो हमारे शरीर में एनर्जी प्रोड्यूस करने के लिए Coffee की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होती क्योंकि सही खानपान फिजिकल एक्टिविटी और सही अमाउंट में नींद का ख्याल रखें। बॉडी को पूरे दिन बहुत ही एनर्जेटिक रखा जा सकता है। लेकिन जो लोग Coffee पीना पसंद करते हैं। उन्हें कुछ लिमिटेशन को खयाल में रखना चाहिए।

कई सारे साइंटिफिक स्टडी के हिसाब से एक हेल्दी इंसान जिसे कोई भी बीमारी नहीं है। उनके लिए दिनभर में 300 से 400 मिलीग्राम कैफीन कंज्यूम करना सेफ माना जाता है। जो कि लगभग तीन से चार कप Coffee के बराबर होता है। और इसी बात को लेकर यूट्यूब पर भी बहुत सारे लोग दिन भर में तीन चार कप कॉफी पीने को सही मानते और दूसरों को भी इसी तरीके की सलाह देते हैं। लेकिन यहां एक बहुत बड़ा ट्विस्ट है। जिसे साइंटिफिक रिसर्च पर आंख बंद करके यकीन करने वाले लोग नहीं जानते। प्रैक्टिकल लाइफ में जब हम देखते हैं।

तो Coffee शरीर में जाने के बाद इसके साथ हर किसी इंसान की बॉडी अलग-अलग तरह से रिएक्ट करती है। जो लोग दिनभर में तीन चार कप कॉफी पीते हैं। तो हो सकता है कि उसको तुरंत Coffee का नुकसान बॉडी में डैमेज के रूप में सामने न आए लेकिन लॉन्ग टर्म में Coffee एडिक्शन के रूप में जरूर सामने आ सकता है। क्योंकि ये बात भी साइंटिफिकली प्रवीन है। कि Coffee को Psychoactive Drug की कैटिगरी में गिना जाता है।

जिसका धीरे-धीरे इंसान आदी होने लगता है। अगर आप उन लोगों में से हैं। जो दिनभर में सिर्फ Coffee पीते हैं लेकिन आपकी टाइमिंग और रूटीन बन चुका है। कि एक कप Coffee ही सही लेकिन हर दिन आपको Coffee चाहिए ही चाहिए तो आप मानें या न मानें। आप भी Coffee की लत का शिकार हो चुके हैं।

एक लॉजिकल और इंटरेस्टिंग बात ये भी है- कि आज पूरी दुनिया में लगभग 200 करोड़ से भी ज्यादा कप Coffee का हर रोज इस्तेमाल किया जाता है। जाहिर सी बात है कि इसमें से ज्यादातर लोगों ने दिन भर में एक कप Coffee पीने से ही शुरुआत की होगी और आज पूरे दिन में 10 कप Coffee पीने वालों की भी कोई कमी नहीं है। क्योंकि जब Coffee की लत लग जाए तो रेगुलर कस्टमर की तरह Coffee खरीदना आपकी मजबूरी हो जाती है। यही तो Coffee कंपनी का बिजनेस टेकनीक है। जिसे ज्यादातर लोग नहीं जानते।

मेरे ओपिनियन में आपको Coffee को अपनी जिंदगी में उतना ही जगह देना चाहिए जिससे कि आप इसे जब चाहें छोड़ सकें। Coffee स्लो एक्टिव होता है। जिसका मतलब है कि इसकी लत एकदम तुरंत नहीं लगती इसी लिए इसका कभी-कभी इस्तमाल किया जाये तो कॉफ़ी एक अची चीज हो सकती है। जैसे की आप एक स्टूडेंट है। तो एग्जामके टाइम पढाई करने के लिए Coffee से फायदा उठा सकते है।  जो लो Exercise करते है और कभी कबार किसी वजसे Pre Workout Milk का इस्तमाल नहीं करते पाते तो ऐसे में  कॉफ़ी को as a pre workout इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन किसी भी सूरत में आपको पूरी तरह से कॉफ़ी पे डिपेंड नई होना चाहिए ये ऐसा इस लिए अगर अपने कॉफ़ी को हर दिन का रूटीन बना दिया तो तो भुत ही ज्यादा उमीद है की आपको कॉफ़ी की लत लग सकती है।

Conclusion

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